सुप्रीम कोर्ट ने हवाई किरायों में भारी अंतर और अनियमित बढ़ोतरी पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से यात्रियों को राहत देने के उपाय करने को कहा है। कोर्ट ने कहा कि एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइनों की ओर से इकॉनमी क्लास के लिए 8,000 से 18,000 रुपये तक किराया लेना गंभीर असमानता दर्शाता है।
 

एयरलाइंस पर मजबूत रेग्युलटेर की मांग

सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई सामाजिक कार्यकर्ता एस. लक्ष्मीनारायण की याचिका पर हुई, जिसमें निजी एयरलाइनों के 'अनिश्चित' किरायों और अतिरिक्त शुल्कों को नियंत्रित करने के लिए मजबूत रेग्युलेटर की मांग की गई है। केंद्र ने बताया कि 2024 का नया कानून लागू हो चुका है और परामर्श जारी है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

किरायों में इस तरह की विसंगति से आम यात्रियों पर बोझ बढ़ता है, इसलिए केंद्र सरकार को राहत देने की दिशा में प्रयास करना चाहिए।

  • दो एयरलाइंस के अलग-अलग किराये से SC चिंतित, केंद्र से कहा- इसका कुछ करें
  • सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा- यात्रियों को मिले राहत
  • कोर्ट बोला- इकॉनमी क्लास के लिए 8,000 से 18,000 तक किराया लेना गंभीर असमानता

पुराने विमान नियमों के पालन को लेकर बहस

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवींद्र श्रीवास्तव ने अदालत में कहा कि 1937 के विमान अधिनियम के तहत बने पुराने नियम अब भी लागू हैं, लेकिन उनका सही पालन नहीं हो रहा। डीजीसीए के पास अत्यधिक या शोषणकारी किरायों पर निर्देश जारी करने की शक्ति है, लेकिन प्रभावी इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

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